पोट्ठ लईका’ में साझेदारी, सीख और व्यवहार परिवर्तन पर सार्थक संवाद
Suraj Pandey 30 Aug 2026 Nudge and Behavioral Economics
राजनांदगांव में एक दिवसीय कार्यक्रम ने पोषण को समुदाय के नेतृत्व वाले व्यवहार परिवर्तन से जोड़ने की दिशा में बढ़ाया कदम
25 अगस्त 2026 | राजनांदगांव, छत्तीसगढ़
राजनांदगांव में ‘पोट्ठ लईका’ पहल के अंतर्गत “साझेदारी, सीख और व्यवहार परिवर्तन संग गोठ—एक नई दिशा की ओर एक पहल” विषय पर एक दिवसीय संवाद एवं सहभागिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पोषण को केवल जागरूकता का विषय न मानते हुए इसे व्यवहार परिवर्तन, सामुदायिक भागीदारी और सामूहिक कार्रवाई से जोड़ना रहा।
यह पहल व्यवहार परिवर्तन के लिए गठबंधन, यूनिसेफ, सर्वहितम् एवं श्रीजन संस्था के सहयोग से आयोजित की गई। कार्यक्रम का नेतृत्व श्रीजन संस्था के संस्थापक श्री शरद श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों, सामाजिक संस्थाओं और समुदाय से जुड़े हितधारकों ने एक मंच पर आकर पोषण एवं व्यवहार परिवर्तन से जुड़े अपने अनुभव, चुनौतियां और संभावित समाधानों पर विचार साझा किए।
पोषण केवल स्वास्थ्य नहीं, बेहतर भविष्य की नींव
कार्यक्रम के दौरान श्री अभिषेक त्रिपाठी, परामर्शदाता, यूनिसेफ ने “पोषण को समृद्ध जीवन और समुदाय के लिए विकास की आधारशिला” विषय पर प्रतिभागियों के साथ संवाद किया। उन्होंने बताया कि पोषण केवल स्वास्थ्य से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास, शिक्षा, सीखने की क्षमता, उत्पादकता और भविष्य से है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पोषण से जुड़े सकारात्मक व्यवहारों को परिवार और समुदाय के दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए लोगों की आवश्यकताओं, परिस्थितियों और व्यवहार को समझना आवश्यक है। केवल जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय लोगों के अनुभवों और वास्तविक जीवन की परिस्थितियों के आधार पर समाधान विकसित करने की जरूरत है।
पोषण की राह में आने वाली बाधाओं को समझना जरूरी
श्री बृजेन्द्र सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी ने “पोषण और हमारे सामने आने वाली बाधाएं” विषय पर चर्चा करते हुए जमीनी स्तर के अनुभवों और समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों को सामने रखा।
उन्होंने कहा कि बेहतर पोषण परिणामों के लिए केवल सेवाओं की उपलब्धता और जानकारी पर्याप्त नहीं है। इसके लिए व्यवहारगत बाधाओं की पहचान, सही जानकारी की पहुंच, सेवाओं का प्रभावी उपयोग तथा विभिन्न विभागों और समुदाय के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
समुदाय बने बदलाव का सक्रिय भागीदार
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण सत्र श्री चंदन कुमार, सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन परामर्शदाता, यूनिसेफ द्वारा “बदलाव की कुंजी के रूप में समुदाय की भागीदारी” विषय पर केंद्रित रहा।
उन्होंने बताया कि स्थायी व्यवहार परिवर्तन तब संभव होता है, जब समुदाय को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि बदलाव का सक्रिय भागीदार बनाया जाए। स्थानीय अनुभवों, समुदाय के ज्ञान, विश्वास और विचारों को परिवर्तन की प्रक्रिया में शामिल करने से समाधान अधिक प्रभावी और टिकाऊ बन सकते हैं।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जब समुदाय स्वयं बदलाव की दिशा तय करने और उसे आगे बढ़ाने में भूमिका निभाता है, तो व्यवहार परिवर्तन अधिक स्वाभाविक और स्थायी बनता है।
मौजूदा मंच और संसाधन बनें बदलाव की ताकत
कार्यक्रम के दौरान एक सहभागितापूर्ण गतिविधि के माध्यम से प्रतिभागियों ने विचार किया कि उनके पास पहले से मौजूद नेटवर्क, संस्थागत मंच, समुदाय से जुड़ाव और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग व्यवहार परिवर्तन के लिए किस प्रकार किया जा सकता है।
इस गतिविधि का उद्देश्य प्रतिभागियों को अपने मौजूदा संसाधनों और क्षमताओं की पहचान करने तथा उन्हें साझेदारी एवं सामूहिक कार्रवाई से जोड़ने के लिए प्रेरित करना था।
विभिन्न हितधारकों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों एवं पेशेवरों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विभिन्न प्रतिभागियों ने भाग लिया।
प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और पोषण, सामुदायिक भागीदारी तथा व्यवहार परिवर्तन के क्षेत्र में संभावित सहयोग और सामूहिक प्रयासों पर चर्चा की।
संवाद के दौरान यह साझा समझ सामने आई कि व्यवहार परिवर्तन केवल जागरूकता फैलाने से नहीं आता। इसके लिए सही जानकारी के साथ-साथ अनुकूल वातावरण, सामुदायिक स्वामित्व, निरंतर संवाद, सहयोग और ऐसे अवसरों की आवश्यकता होती है, जो लोगों को सकारात्मक व्यवहार अपनाने और उसे बनाए रखने में मदद करें।
‘पोट्ठ लईका’ से साझेदारी और सामूहिक कार्रवाई की ओर
‘पोट्ठ लईका’ ने विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हितधारकों को एक साझा मंच पर लाकर सीखने, अनुभव साझा करने और सहयोग की नई संभावनाएं तलाशने का अवसर प्रदान किया।
यह पहल इस विचार को मजबूत करती है कि पोषण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर स्थायी बदलाव के लिए सरकार, सामाजिक संस्थाओं, समुदाय और अन्य हितधारकों के बीच निरंतर साझेदारी आवश्यक है।
व्यवहार परिवर्तन के लिए गठबंधन, यूनिसेफ, सर्वहितम् एवं श्रीजन संस्था के सहयोग से आयोजित यह पहल इस संदेश को मजबूत करती है कि जब ज्ञान, अनुभव, संसाधन और समुदाय की आवाज एक साथ आती है, तभी व्यवहार परिवर्तन को प्रभावी और स्थायी रूप दिया जा सकता है।