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बीजादूतीर की अनोखी सेवा : कंधों पर नदी पार कराकर कराया मोतियाबिंद ऑपरेशन

Lekhika 19 Jul 2024 Social change and Community Champions

बीजादूतीर की अनोखी सेवा : कंधों पर नदी पार कराकर कराया मोतियाबिंद ऑपरेशन
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परिस्थितियां कितनी भी कठिन और प्रतिकूल क्यों नहीं हो, परंतु उसके समाधान के प्रति हमारा प्रण और बेहतर रणनीति हो तो सबकुछ आसान हो जाता है। कुछ ऐसा ही बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक में निवास करने वाले बीजादूतीर राकेश कश्यप और भारत कोराम ने कर दिखाया है। इन्होंने अपनी निस्वार्थ सेवा और समर्पण से समाज को एक नई प्रेरणा दी है। इन दोनों ने नदी के पार स्थित दुर्गम क्षेत्र बेचापाल में अपनी स्वयंसेवा भावना का परिचय दिया, जहां पहुंचना अत्यंत कठिन होता है। अपने कर्तव्य का पालन करते हुए, इन्होंने जिले के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

कठिनाईयों के बावजूद सेवा का संकल्प

बेचापाल क्षेत्र, जो  नदी के पार स्थित है, वहां पहुंचना अत्यंत कठिन होता है। इस क्षेत्र में पहुंचने के लिए नदी को पार करना पड़ता है, जो एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। राकेश कश्यप और भारत कोराम ने इस चुनौती को स्वीकार किया और बिना किसी भय के नदी पार कर बेचापाल के लोगों की सेवा करने का संकल्प लिया।

बुजुर्गों की आंखों की जांच

राकेश और भारत ने अपने गांव और आसपास के गांवों के बुजुर्ग व्यक्तियों को आंखों की जांच के लिए प्रेरित किया। इन्होंने 25 बुजुर्गों को अपने कंधों पर ढोकर नदी पार करवाया और उन्हें आंखों की जांच के लिए ले गए। यह कार्य न केवल शारीरिक रूप से कठिन था, बल्कि उनके समर्पण और सेवा भावना का भी प्रमाण था।


मोतियाबिंद का इलाज

आंखों की जांच के पश्चात, जिन बुजुर्गों को मोतियाबिंद की शिकायत पाई गई, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाते हुए उनका मोतियाबिंद का इलाज करवाने में भी राकेश और भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनकी इस पहल ने कई बुजुर्गों की दृष्टि को पुनः प्राप्त करने में सहायता की और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया।

सामाजिक सेवा का प्रभाव

राकेश कश्यप और भारत कोराम की इस निस्वार्थ सेवा ने समाज में एक नई आशा का संचार किया। इन्होंने दिखाया कि समर्पण और सेवा भावना से किसी भी कठिनाई का सामना किया जा सकता है और समाज के कमजोर वर्गों की मदद की जा सकती है। इनकी इस सेवा ने न केवल बुजुर्गों के जीवन में रोशनी लाई, बल्कि गांव के अन्य लोगों को भी प्रेरित किया कि वे भी समाज की सेवा के लिए आगे आएं।

निष्कर्ष

बीजादूतीर राकेश कश्यप और भारत कोराम की यह सफलता की कहानी उनके समर्पण और सेवा भावना का अद्वितीय उदाहरण है। इन्होंने दिखाया कि जब दिल में सेवा का संकल्प हो और मन में समाज की भलाई का विचार हो, तो कोई भी कठिनाई आड़े नहीं आती। इनकी इस पहल ने न केवल बुजुर्गों की दृष्टि को वापस लाने में मदद की, बल्कि समाज में एक नई प्रेरणा का संचार किया। राकेश और भारत की यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची सेवा वही है जो कठिनाइयों के बावजूद भी की जाए और समाज के हर वर्ग के जीवन में सुधार लाए।