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यूनिसेफ ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला पत्रकारों के कौशल और नेतृत्व को किया सम्मानित

SBC_2023 08 Mar 2024 Social change and Community Champions

यूनिसेफ ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला पत्रकारों के कौशल और नेतृत्व को किया सम्मानित
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- यूनिसेफ रायपुर ने प्रमुख महिला पत्रकारों के साथ बिताया समय 

- उत्कृष्ट सेवा देनेवाली महिला पत्रकारों ने साझा किया प्रेरक अनुभव 

रायपुर, 8 मार्च, 2024 — अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, यूनिसेफ रायपुर ने एक उल्लेखनीय कार्यक्रम की मेजबानी करते हुए रायपुर की वैसी प्रमुख महिला पत्रकारों को एक साथ लाया, जिसने अलग अलग विषय पर महारत हासिल करके समाज में बदलाव लाया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बेहतर संवाद को बढ़ावा देना, अंतर्दृष्टि प्राप्त करना और पत्रकारिता के क्षेत्र में ऐसी अग्रणी महिलाओं के उल्लेखनीय योगदान को यादगार बनाते हुए खुशनुमा माहौल बनाना था। ऐसे कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं के उभरते नेतृत्व को बढ़ावा देना पहली प्राथमिकता थी। 


इस दौरान उनके पत्रकारिता की जीवन यात्रा के बारे में दिलचस्प बातचीत हुई। इन निपुण महिलाओं ने अपने व्यक्तिगत कार्य को प्रचलित सामाजिक मानदंडों से जोड़ते हुए एक खुले संवाद में अपने अनुभवों, चुनौतियों और सर्वमान्य जीत को साझा किया। व्यापक सामाजिक संदर्भों के साथ उनकी कहानियों में गहरी जड़ें जमा चुके सामाजिक मानदंडों को चुनौती देने की शक्ति का भाव दिखा, जो उनके कौशल को स्वतः परिभाषित करती है। 

यूनिसेफ ने इस अवसर पर ऐसी उत्कृष्ट पत्रकारों की अटूट प्रतिबद्धता और नेतृत्व का सम्मान किया। 

जिन महिला शक्ति को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया, वे इस प्रकार हैं :

प्रियंका कौशल(भारत एक्सप्रेस): निडरतापूर्वक खोजी पत्रकारिता से भ्रष्टाचार और सामाजिक अन्याय को उजागर किया।

रजनी ठाकुर(The Better India): एक विनम्र पृष्ठभूमि से आने वाली, महिलाओं के अधिकारों की एक उत्साही वकील, जिनकी रिपोर्टिंग ने अंतिम पंक्ति में रहने वाले समुदायों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डाला है और आमूलचूल परिवर्तन की प्रणेता बनी।

ममता लांजेवार(न्यूज 18,CG/MP): महिला शक्ति को मूर्त रूप देने हेतु प्रतिबद्ध और समर्पित पत्रकार जिन्होंने ग्रामीण महिलाओं की आवाज़ को बढ़ाया है, उनकी कहानियों को सामने लाया।

ममता मानकर( दैनिक भास्कर) : एक प्रेरक कहानीकार जिन्होंने लिंग आधारित हिंसा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रत्यक्ष काम किया।


आयुषी शर्मा(The Times of India): नवोदित पत्रकार आयुषी की रिपोर्टिंग ने अपनी पत्रकारिता से वैसी रूढ़िवादिता को चुनौती दी है, जो बेहतर स्वास्थ्य की रुकावटें थी। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवहार परिवर्तन को अपनाने में पत्रकारिता की भूमिका को नया आयाम दिया।

स्वाति कौशिक(लोकमत): एक अनुभवी पत्रकार जिन्होंने लगातार लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय की वकालत की है, जो निरन्तर जारी है।

यूनिसेफ के सिविल लाइन स्थित कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित छत्तीसगढ़ यूनिसेफ प्रमुख जॉब जकारिया ने लिंग-संबंधी मुद्दों को प्रकाश में लाने में सहानुभूति और समझ विकसित करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा, “हमें महिलाओं और लड़कियों की आवाज़ को बुलंद करना चाहिए, और इस हेतु सहानुभूतिपूर्ण श्रोता बनना चाहिए। सामाजिक कार्य में जुड़े संस्थाओं और लोगों के साथ समावेशन को बढ़ावा देकर और अन्य बाधाओं को तोड़कर, हम एक मज़बूत न्यायसंगत दुनिया का निर्माण कर सकते हैं।''

 यूनिसेफ लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, और इस तरह के आयोजन करके यूनिसेफ ने अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाया है। श्री जकारिया ने अपील करते हुए कहा कि "आइए !  हम उनकी आवाज उठाना, मानदंडों को चुनौती देना और अधिक न्यायपूर्ण और समान समाज की दिशा में सामूहिक रूप से काम करना जारी रखें।"