बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत की ओर एक कदम- युवा बन रहे बदलाव की आवाज़
ग्राम सभाओं से उठी सामूहिक आवाज़—“बाल विवाह नहीं, बच्चों को सुरक्षित बचपन और उज्ज्वल भविष्य चाहिए।”
बाल विवाह की रोकथाम केवल कानून के पालन का विषय नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य से जुड़ा एक सामूहिक सामाजिक दायित्व है। इसी सोच को समुदाय तक पहुँचाने और ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में ग्राम सभाएँ बदलाव के महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आ रही हैं।
इसी क्रम में जशपुर, बिलासपुर एवं जांजगीर-चांपा जिलों में आयोजित विभिन्न ग्राम सभाओं में युवोदय समन्वयकों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए बाल विवाह की रोकथाम पर समुदाय के साथ संवाद किया।
ग्राम सभा बनी संवाद और संकल्प का मंच
ग्राम सभाओं के दौरान ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और समुदाय के अन्य सदस्यों के साथ बाल विवाह के दुष्परिणामों पर चर्चा की गई। संवाद में यह समझ विकसित करने का प्रयास किया गया कि कम उम्र में विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, अवसरों और भविष्य को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है।
साथ ही, समुदाय को बाल विवाह की रोकथाम में उनकी भूमिका और सामूहिक जिम्मेदारी के बारे में जानकारी दी गई। संदेश स्पष्ट था—बाल विवाह को रोकने के लिए केवल किसी एक विभाग या व्यक्ति का प्रयास पर्याप्त नहीं है; इसके लिए परिवार, पंचायत, युवा और पूरे समुदाय की भागीदारी आवश्यक है।
जागरूकता से आगे—सामूहिक प्रतिबद्धता
इन ग्राम सभाओं की खास बात यह रही कि संवाद केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीणों ने मिलकर अपनी ग्राम पंचायत को “बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत” बनाने का सामूहिक संकल्प लिया और बाल विवाह रोकथाम की शपथ भी ली।
यह शपथ एक महत्वपूर्ण संदेश देती है—जब समुदाय स्वयं किसी सामाजिक बदलाव की जिम्मेदारी स्वीकार करता है, तब परिवर्तन की संभावना और मजबूत होती है।
युवा बन रहे बदलाव की आवाज़
इस पहल में युवोदय समन्वयकों की सहभागिता यह भी दर्शाती है कि युवा केवल जागरूकता संदेश पहुँचाने वाले नहीं, बल्कि समुदाय और व्यवस्था के बीच बदलाव के सक्रिय सहभागी बन सकते हैं।
ग्राम सभा जैसे स्थानीय लोकतांत्रिक मंचों पर युवाओं की भागीदारी बाल विवाह जैसे सामाजिक मुद्दों पर खुली बातचीत को बढ़ावा देती है और समुदाय के भीतर से समाधान एवं सामूहिक कार्रवाई की जमीन तैयार करती है।
हर ग्राम सभा में संवाद, हर पंचायत में संकल्प और हर बच्चे के लिए सुरक्षित बचपन—यही बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में एक मजबूत कदम है।
एक साथ उठी आवाज़—
“बाल विवाह नहीं—बच्चों का सुरक्षित बचपन और उज्ज्वल भविष्य!”